“वन विभाग में उबाल: समस्याओं के निराकरण नहीं होने पर बिलासपुर संभाग के वन कर्मचारियों ने छेड़ा चरणबद्ध आंदोलन, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी”

“वन विभाग में उबाल: समस्याओं के निराकरण नहीं होने पर बिलासपुर संभाग के वन कर्मचारियों ने छेड़ा चरणबद्ध आंदोलन, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी”
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के बैनर तले वन वृत्त बिलासपुर के कर्मचारियों ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। लंबे समय से लंबित मांगों, नियम विरुद्ध स्थानांतरण, कर्मचारियों की उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है। संघ का आरोप है कि कई बार ज्ञापन, अनुरोध और चर्चा के बावजूद वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में कोई गंभीर रुचि नहीं दिखाई, जिसके चलते कर्मचारियों में भारी नाराजगी व्याप्त है।


संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वन वृत्त बिलासपुर के संभागीय अध्यक्ष और सचिव द्वारा समय-समय पर कर्मचारियों की समस्याओं से विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जाता रहा, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामलों को लंबित रखा गया। विशेष रूप से नियम विरुद्ध स्थानांतरण, कार्यस्थल पर दबाव, कर्मचारियों की प्रशासनिक परेशानियां तथा अन्य लंबित मामलों को लेकर कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ता गया। अब स्थिति यह हो गई है कि कर्मचारी आंदोलन के लिए मजबूर हो गए हैं।

छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ, संभाग बिलासपुर द्वारा जारी आंदोलन कार्यक्रम के अनुसार विरोध प्रदर्शन चार चरणों में किया जाएगा। प्रथम चरण में 13 मई 2026 को कर्मचारी ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद 18 मई 2026 को भोजन अवकाश के दौरान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, वृत्त बिलासपुर के सामने सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया जाएगा। तीसरे चरण में 25 मई 2026 को कर्मचारी एक दिवसीय अवकाश लेकर संपूर्ण कार्य बंद रखेंगे। वहीं मांगों का समाधान नहीं होने की स्थिति में आगामी तिथि पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
संघ ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि समय रहते समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो वन विभाग का कार्य पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन लगातार कर्मचारियों की जायज मांगों को नजरअंदाज कर रहा है, जबकि मैदानी स्तर पर वन कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। बावजूद इसके उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

वन कर्मचारी संघ ने शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आंदोलन की स्थिति बनी तो उसकी पूरी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों और शासन की होगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते रहे, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो अब आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचा है।
वन विभाग में बढ़ते असंतोष और प्रस्तावित आंदोलन को लेकर अब प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में वन विभाग का कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।














